हैप्पी रामनवमी
लेकिन आज राम आस्था के प्रतीक कम , राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के मोहरे ज्यादा बन गए हैं ।राम के चरित्र की मुख्य विशेषता मर्यादा तो राम के तथाकथित भक्तों ने तभी तार तार कर दी थी , जब ६ दिसम्बर को अयोध्या की मर्यादा भूमि पर कारसेवकों द्वारा अमर्यादित उत्पात मचाया गया था , जिसे दुस्साहस कहना ज्यादा उचित होगा । ज्यों ही ' बच्चा बच्चा राम का , जन्मभूमि के नाम का ' के नारे गूंजे होंगे , त्यों ही राम अपने ' दूसरे बनवास ' को चल दिए होंगे ।
गांधी सुशासन को रामराज्य का पर्याय बताते थे । राम के नाम पर राज्य में फैला दुशासन देखते तो ' हे राम ! ' भी न कह पाते अंत में जाते जाते । रामनवमी पर राम की प्रतिमा पर फूल चाहे मत चढ़ाइए मंदिर में जा कर लेकिन मर्यादा के उनके आदर्श का कुछ अंश अपने अन्दर जरुर बचा लीजियेगा |
और फिर चाहे तो मोबाइल और फेसबुक पर ' हैप्पी रामनवमी ! ' कहते रहिएगा ।
-निशांत
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